Agricultural College : बिहार में खुलेगा एक और कृषि महाविद्यालय.

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Agricultural College : मखाना और अन्य फसलों के मूल्य संवर्द्धन के लिए बीएयू सबौर में द्वितीयक (सेकेन्ड्री) कृषि महाविद्यालय बनेगा। यहां एक फसल के अलग-अलग उत्पाद बनाकर बाजार में लाने पर शोध होगा। इस कॉलेज में द्वितीयक कृषि से संबंधित कई कोर्सों की पढ़ाई कराई जाएगी। बिहार ही नहीं देश में यह इस तरह का पहला कॉलेज होगा।

मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार डॉ. मंगला राय ने शुक्रवार को ज्ञान भवन में आयोजित मखाना महोत्सव का उद्घाटन करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने बताया कि पूसा में भी गुड़ पर काम हो रहा है। चीनी से ज्यादा महंगा गुड़ बिकता है तो क्यों नहीं गुड़ उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। गुड़ के साथ मखाना का फोर्टिफिकेशन होने से किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि मखाना के मूल्य संवर्द्धन पर काम करने की आवश्यकता है। ये हमें मखाना उत्पादक किसानों से पता करना होगा कि मखाना से संबंधित हाथ से किये जाने वाले कार्य और मशीन से किये जाने वाले कार्यों में और क्या सुधार की आवश्यकता है? इसलिए हमें अनुसंधान और तकनीकी विकास पर भी चर्चा करनी होगी। कृषि सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि मखाना का क्षेत्र विस्तार किया जा रहा है। ज्यादा पानी वाले जिलों पूर्णिया, दरभंगा, मधेपुरा, किशनगंज, सुपौल, अररिया, मधेपुरा और खगड़िया में मखाना की खेती होने लगी है। महोत्सव में विभिन्न कंपनियों के 30 स्टॉल लगे हैं। मखाना के साथ मछली उत्पादन के तरीके बताए जा रहे हैं। मखाना कैसे तैयार होता है, यह भी बताया गया है।

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कंपनियों के स्टॉल पर मखाना की प्रोसेसिंग कर अलग-अलग पैकेट में बेचे जा रहे हैं। लोग इन स्टॉल से मखाना की खरीदारी भी कर रहे हैं।

स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

पहले दिन तकनीकी सत्र में शहर के प्रसिद्ध चिकित्सकों ने स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से मखाना की महत्ता बताई। आईजीआईएमएस के अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने कहा कि इसमें पर्याप्त मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट होता है। एम्स के डॉ. संजीव, डॉ. वीणा, आईजीआईएमएस के डा. निखिल ने भी विचार रखे। एपीडा के महाप्रबंधक ने मखाना के निर्यात की बारीकियां बताईं।

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